“मेरी रेल”

train poem

Train Poem

मेरे पास खिलौना रेल

देखो बच्चों मेरी रेल

छुक छुक यह करती है

चाबी देकर चलती है

इधर उधर भी मुड़ती है

इंजन इसका भागा जाए

पीछे पीछे डिब्बे आएं

सब बच्चों को साथ भगाए

नकली हम भी टिकट बनाएं

सिटी देकर इसे रुकाएं

खेलम खेल हम खेलें खेल

ऐसी अद्भुत हमारी रेल
।।।

पढ़ें “छत्त पर आया बन्दर”

Priyanka G

Writer | VO Artist | TV Presenter | Entrepreneur

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