“कहाँ रूठी है ज़िन्दगी” 

life and dreams

अरे सोते रहने वालों
ज़रा उठ जाग कर तो देखो

कहाँ रूठी है ज़िन्दगी
कहाँ है राह रुकी हुई

ज़िन्दगी ने तुमसे नहीं
तुमने ज़िन्दगी से मुँह मोड़ा है

क्या दोष फिर इसमें दुनिया का
तू खुद ही खुद से भगोड़ा है

बंद आँखों से सपने देखने वालों
ज़रा खुद सपने बुन कर तो देखो

ऊंच नीच की लहरें आती जाती
इस बिन ज़िन्दगी का सफ़र अधूरा है

ज़रा देख झाँक कर अंदर अपने
बिन सपनों के तू भी कहाँ पूरा है

कोई लक्ष्य अगर हो जीवन में
हो ललक सपनों को सच्च करने की

उठ खड़ा हो, जाग नींद से
देख तुझसे रूठी नहीं है ज़िन्दगी ।।।

Priyanka G

Writer | VO Artist | TV Presenter | Entrepreneur

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3 Responses

  1. Ankush Verma says:

    Superb.

  2. Anjula Devi says:

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  3. Sondipon Gogoi says:

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